Thursday, January 8, 2026

  सृजन सेवा संस्थान , श्रीगंगानगर द्वारा साहित्यिक योगदान के लिए सृजन साहित्य सम्मान २०२६ प्रदान किया गया /

 'तिनका- तिनका नेह'    इसमें टाइटल और  पूरी किताब में '        '  नहीं लगाने है   तिनका तिनका नेह लिखिए /

शीर्षक में डैश की जगह छोटा हाइफ़न लगाइये/

कविता  १, लाइन १ आंकलन 

कविता १६     अपना अपना अंदाज़       शीर्षक में डैश की जगह छोटा हाइफ़न लगाइये/

  कविता २८   आख़िरी लाइन से ? हटा दीजिये 

कविता २९  पैरा २ की लाइन ३   में में  हटाना है 

कविता ३० लाइन ३    सरीखे 

कविता ३१  हटाइये,  यह कविता १९ नंबर पे आ चुकी है/ इसकी जगह् यह दूसरी कविता लगाइये


परछाई 

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 रात में तनहा सड़क पर 

संग संग अंधेरे में 

उभरती लंबी पतली परछाई 

उदास लंबी रात सी ही होती है 

दूर तक फ़ैली हुए/  


दिन काम की व्यवस्तता में 

छोटा सा प्रत्तीत होता है 

दिन में उभरने वाली छोटी 

परछाई समान /

पेज  ३५  फूली फूली रोटियां  ,    दिन भर की थकान          दोनों में  डैश की जगह छोटा हाइफ़न लगाइये/

पूरी  बुक में जहाँ जहाँ भी डैश  है, कमांड से हाइफ़न लगा लीजिये/

कविता ३९  नीच से दूसरी लाइन     यूं ही 

कविता ३९  आख़िरी लाइन     युग-युगांतर 

पेज ८३ पे कविता के नीचे मेरा नाम नहीं लिखना है/

Monday, January 5, 2026

सृजन सेवा संस्थान के मासिक कार्यक्रम 'लेखक से मिलिए' की १३६ वीं कड़ी





 सृजन सेवा संस्थान के मासिक कार्यक्रम 'लेखक से मिलिए' की १३६ वीं कड़ी  के अंतर्गत  ४ जनवरी , 2026 को  श्री गंगानगर में प्रबुद्ध श्रोतागण के समक्ष काव्य प्रस्तुति, अनुवाद से सम्बंधित कुछ मुद्दों पर चर्चा एवं अंकशास्त्र से सम्बंधित कुछ पहलुँओं पर बातचीत का अवसर मिला/ मैं  सृजन संसथान के आभारी हूँ मुझे यह सुअवसर प्रदान करने के लिये/ मीडिया के प्रति भी हार्दिक आभार शानदार कवरेज के लिए/ साथ ही प्रस्तुत हैं यादगार लम्हों के कुछ चित्र/

Friday, January 2, 2026

आमन्त्रण





आमन्त्रण


 

इतना इतराया मत करो

 इतना इतराया  मत करो 

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तुम्हारी भव्यता की क़ायल हूँ मैं  
मुझे यह स्वीकारने में
 कोई हिचक नहीं 
अनगिनत तारों जैसी 
 तुम्हारी लहरें गिनना 
 मुमकिन नहीं 
और उस से भी दुश्वार है 
तुम्हारी गहराई की थाह पाना 

पर, सागर तुम इतना इतराया मत करो 
तुम रेत को अपने आवेश में 
बहा ले जा सकते हो 
चट्टान से लड़ने का हौसला 
क्या हैं  तुम में ?

सूर्य की तपन तुम्हे भी 
झेलनी पड़ती है 
पूरे चाँद की रात 
तुम्हें भी मदहोश करती है 
तुम केवल अपनी धुन के 
राजा नहीं हो सकते/

रजनी छाबड़ा 

Wednesday, December 31, 2025

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